#बदतमीज़_औरतें

#बदतमीज़_औरतें

रूपाली जाधव    Jul 20,2020 - Women


 

हम नहीं पहनतीं पैरो में पायल 

जिससे तुम्हें हो आभास

हमारी मौज़ूदगी का

और हमें हो एहसास

अपने दायरे का

 

हम नहीं पहनतीं नाक में नथनी 

जिससे लगे पहरा 

हमारी सांस पर

और हमें हो एहसास

अपने क़ैद होने का

 

हम नहीं पहनतीं हाथों में चूड़ियाँ 

जिसकी खनक नज़र रखे

हमारी हर बात पर 

और हमें हो एहसास 

अपने नज़रबंद होने का

 

हम नहीं पहनतीं कोई भी चोला

किसी भी धर्म का

जिससे हमें बाँटा जाए

और हमें हो एहसास

इन्सान होने से पहले 

मज़हबी होने का

 

हम नहीं लगाती आँखों में काजल

जिसके लगाने से 

राहें हो जाएँ धुंधली 

और हमें हो एहसास

अपने भटके होने का

 

हम नहीं लगातीं माँग में सिंदूर 

जो खिंचता है लकीर

एक सीमा बनकर

और हमें हो एहसास

अपनी हदों का

 

हम नहीं लगातीं माथे पर बिंदी 

जो लगाए हम पर मुहर 

किसी की जागीर होने की

और हमें हो एहसास

अपने वस्तु होने का

 

हम नहीं रिझातीं किसी भी मर्द को

कठपुतली की तरह

हम नहीं हो सकतीं मादक

शराब की तरह

हम ढूंढती हैं ख़ुद का वज़ूद

ख़ुद के नज़रिए से

हाँ हम हैं, बदतमीज़ औरतें।

 

- रूपाली जाधव

(कबीर कला मंच)

9881844853

Comments

  1. Rupali Jadhav- Jul 22,2020

    Thanks.

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